Bhopal Farmers Protest: Gen-Z किसानों ने संभाला मोर्चा, CM हाउस घेरने की तैयारी; सरकार के सामने रखीं दो बड़ी मांगें

भोपाल में Gen-Z किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। किसान CM हाउस मार्च की तैयारी में हैं। 100% मूंग खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार सहित दो प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी है।

Bhopal Farmers Protest: Gen-Z किसानों ने संभाला मोर्चा, CM हाउस घेरने की तैयारी; सरकार के सामने रखीं दो बड़ी मांगें

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया। कई जिलों से पहुंचे किसान राजधानी में डटे हुए हैं और अब मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

25 दिनों के आंदोलन के बाद राजधानी पहुंचे किसान-

किसानों का कहना है कि वे पिछले लगभग 25 दिनों से अपने-अपने जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण अब आंदोलन को भोपाल तक लाया गया है। आंदोलन में मुख्य रूप से नर्मदापुरम संभाग सहित आसपास के करीब 12 जिलों के किसान शामिल हैं।

सरकार से बातचीत रही बेनतीजा-

मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों से बातचीत की। दोनों पक्षों के बीच लंबी चर्चा हुई, लेकिन किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने और धरना जारी रखने का फैसला किया।

दो प्रमुख मांगों पर अड़े किसान-

हालांकि किसान संगठनों ने सरकार के सामने कुल आठ मांगें रखी हैं, लेकिन फिलहाल दो मुद्दों को सबसे अहम बताया जा रहा है—

मूंग की फसल की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।

खाद वितरण में लागू टोकन व्यवस्था समाप्त कर किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध कराई जाए।

किसानों का कहना है कि इन्हीं दो मांगों के समाधान से हजारों किसानों को राहत मिलेगी।

मूंग उत्पादन बढ़ाने के बाद खरीद से पीछे हटने का आरोप-

प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि सरकार ने पहले किसानों को मूंग की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन अब खरीद से पीछे हट रही है। उनका दावा है कि इस वजह से किसानों को प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का यह भी कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है।

आंदोलन की कमान युवा किसानों के हाथ में

इस बार का किसान आंदोलन कई मायनों में अलग नजर आ रहा है। आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा और Gen-Z किसान शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खेती से जुड़े मुद्दों पर अब नई पीढ़ी खुलकर सामने आ रही है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

सड़क पर ही बनाया भोजन, धरना जारी

रातभर धरने पर बैठे किसानों ने सड़क किनारे ही चूल्हा जलाकर दाल-बाटी बनाई और वहीं भोजन किया। किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे लंबे समय तक आंदोलन चलाने के लिए भी तैयार हैं। उनका दावा है कि जरूरत पड़ने पर राशन की व्यवस्था भी धरना स्थल पर ही कर ली जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, भारी पुलिस बल तैनात-

किसानों के राजधानी पहुंचने के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। होशंगाबाद रोड सहित कई इलाकों में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है। प्रशासन लगातार किसान नेताओं से बातचीत कर स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रदर्शनकारी फिलहाल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

कई स्कूलों में अवकाश-

किसान आंदोलन और संभावित यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए भोपाल के कई निजी और शासकीय स्कूलों ने एहतियातन छुट्टी घोषित कर दी है।

ट्रैफिक डायवर्जन लागू-

आंदोलन के कारण भोपाल के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। पुलिस प्रशासन ने वैकल्पिक रूट जारी किए हैं।

नर्मदापुरम रोड से आने वाले वाहन 11 मील बाईपास होकर खजूरी कला, एसओएस रोड और पिपलानी मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।

मिसरोद और भोपाल विश्वविद्यालय के बीच रहने वाले लोग बावड़ियांकला ब्रिज के रास्ते कोलार और 10 नंबर क्षेत्र की ओर जा सकते हैं।

एमपी नगर से नर्मदापुरम रोड जाने वाले वाहन गोविंदपुरा, पिपलानी, पटेल नगर और खजूरी कला मार्ग का उपयोग करें।

एम्स जाने वाले लोगों को कटारा हिल्स, बागसेवनिया और आरएलएल ब्रिज के नीचे से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

फिलहाल क्या स्थिति है?-

राजधानी भोपाल में किसान लगातार धरने पर बैठे हुए हैं और सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है तो मुख्यमंत्री आवास की ओर प्रस्तावित मार्च और आंदोलन दोनों और व्यापक हो सकते हैं। प्रशासन भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।