पायलट के साथ हो गया धोखा, रातों-रात पलटा गेम? मानेसर से जयपुर पहुंचे इस नेता ने बदल दी थी पूरी कहानी

राजस्थान के 2020 के सियासी संकट में सचिन पायलट समर्थक विधायकों के साथ मानेसर पहुंचे थे। उनके साथ दिग्गज विधायक भंवरलाल शर्मा भी थे, लेकिन बाद में शर्मा के जयपुर लौटकर अशोक गहलोत से मिलने ने सियासी समीकरण बदल दिए। जानिए मानेसर कांड की पूरी कहानी।

पायलट के साथ हो गया धोखा, रातों-रात पलटा गेम? मानेसर से जयपुर पहुंचे इस नेता ने बदल दी थी पूरी कहानी
Sachin pilot

राजस्थान की राजनीति में एक कहावत अक्सर दोहराई जाती है कि यहां कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। साल 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके डिप्टी सचिन पायलट के बीच हुआ सियासी टकराव इसका बड़ा उदाहरण माना जाता है।

एक समय ऐसा आया जब सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर पहुंच गए। राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे और पायलट के अगले कदम को लेकर पूरे देश की निगाहें राजस्थान पर टिक गईं।

इस दौरान पायलट के साथ मौजूद सबसे चर्चित नेताओं में से एक थे पंडित भंवरलाल शर्मा।

लेकिन कुछ ही समय बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि पूरी तस्वीर बदल गई।

कौन थे भंवरलाल शर्मा?

26 जनवरी 1945 को जन्मे भंवरलाल शर्मा राजस्थान की राजनीति के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और बाद में सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र उनकी राजनीतिक पहचान बन गया। 1985 में वे पहली बार लोकदल से विधायक बने। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वे सात बार विधायक चुने गए और अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहते हुए अपनी सियासी पकड़ बनाए रखी। भैरोंसिंह शेखावत सरकार में वे मंत्री भी रहे। लेकिन उनके लंबे राजनीतिक करियर का सबसे चर्चित अध्याय 2020 के राजस्थान सियासी संकट के दौरान सामने आया।

जब मानेसर पहुंचे सचिन पायलट

जुलाई 2020 में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद राजस्थान की कांग्रेस सरकार के भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया। पायलट के साथ मौजूद विधायकों में भंवरलाल शर्मा भी शामिल थे। उनके राजनीतिक अनुभव और लंबे सियासी करियर को देखते हुए उनकी मौजूदगी को पायलट कैंप के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

कथित ऑडियो टेप से मचा सियासी भूचाल

इसी सियासी संकट के दौरान कुछ कथित ऑडियो टेप सामने आए। इन टेप को लेकर राजस्थान की सरकार गिराने की कथित साजिश और विधायकों की खरीद-फरोख्त जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। विवाद में भंवरलाल शर्मा का नाम भी सामने आया। मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पुलिस और कानूनी कार्रवाई तक पहुंचा। हालांकि कथित ऑडियो टेप और उससे जुड़े आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की तरफ से अलग-अलग दावे और खंडन किए गए थे। इसके बावजूद इस विवाद ने राजस्थान के राजनीतिक संकट को नया मोड़ जरूर दे दिया।

मानेसर से जयपुर और गहलोत से मुलाकात

इसके बाद भंवरलाल शर्मा मानेसर से जयपुर लौट आए और तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि कुछ समय पहले तक शर्मा पायलट खेमे के साथ दिखाई दे रहे थे। राजनीतिक गलियारों में इसे पायलट कैंप के लिए बड़ा झटका माना गया। इसके बाद सियासी संकट धीरे-धीरे सुलझने लगा और सचिन पायलट सहित उनके समर्थक विधायक भी कांग्रेस के साथ वापस आ गए।

क्या शर्मा ने पलट दिया था पायलट का गेम?

2020 के इस घटनाक्रम को लेकर आज भी राजस्थान की राजनीति में अलग-अलग व्याख्याएं की जाती हैं। एक नजरिया यह है कि भंवरलाल शर्मा जैसे अनुभवी विधायक का मानेसर से लौटना पायलट खेमे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका था। हालांकि यह कहना कि अकेले शर्मा के फैसले के कारण पायलट मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सरलीकरण होगा। पायलट की बगावत के नतीजे पर विधायकों की संख्या, अशोक गहलोत की रणनीति, कांग्रेस हाईकमान का हस्तक्षेप और अदालत में चली कानूनी लड़ाई सहित कई कारकों का प्रभाव था। इसलिए 'धोखा' शब्द को स्थापित तथ्य के बजाय उस समय के सियासी घटनाक्रम की एक राजनीतिक व्याख्या के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।

आज भी क्यों याद किया जाता है मानेसर कांड?

9 अक्टूबर 2022 को 77 साल की उम्र में भंवरलाल शर्मा का निधन हो गया। उनके निधन के बाद राजस्थान के अलग-अलग राजनीतिक खेमों के नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन और प्रभाव को याद किया। लेकिन राजस्थान की राजनीति में उनकी विरासत का जिक्र होता है तो 2020 का मानेसर कांड जरूर सामने आता है। क्योंकि वह राजस्थान की राजनीति का वह दौर था जब सचिन पायलट और अशोक गहलोत आमने-सामने थे, कांग्रेस सरकार संकट में दिखाई दे रही थी और हर विधायक के अगले कदम पर पूरे प्रदेश की निगाह थी। उसी कहानी के सबसे दिलचस्प किरदारों में से एक थे भंवरलाल शर्मा। अब सवाल यही है - क्या मानेसर से भंवरलाल शर्मा की वापसी ने सचिन पायलट का सियासी गेम पलट दिया था या पायलट की रणनीति पहले ही कमजोर पड़ चुकी थी?