मंत्री पर सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत

Rajasthan High Court ने बांसवाड़ा के निलंबित शिक्षक Lal Singh Chauhan को बड़ी राहत देते हुए उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया।

मंत्री पर सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत

Rajasthan High Court ने निलंबित शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उनका सस्पेंशन रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सरकारी अधिकारी को कानून से परे जाकर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है और निलंबन जैसे गंभीर कदम के लिए वैधानिक आधार होना जरूरी है।

जस्टिस Farjand Ali की बेंच में शिक्षक Lal Singh Chauhan की ओर से अधिवक्ता लोकेश माथुर ने याचिका पेश की।

मंत्री के खिलाफ पोस्ट करने पर हुआ था निलंबन

याचिकाकर्ता बांसवाड़ा जिले में शिक्षक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें 23 सितंबर 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्रारंभिक शिक्षा, बांसवाड़ा द्वारा निलंबित कर दिया गया था।

आरोप था कि शिक्षक ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर मंत्री के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणियां की थीं, जिससे विभाग और मंत्री की छवि धूमिल हुई।

कोर्ट ने पूछा- किस कानून के तहत कार्रवाई?

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि निलंबन आदेश राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था। आदेश में किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लेख भी नहीं था।

वहीं राज्य सरकार ने कहा कि शिक्षक की टिप्पणियां विभागीय अनुशासन के खिलाफ थीं और मंत्री की छवि प्रभावित हुई, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी।

कानून के दायरे में हो हर प्रशासनिक कार्रवाई

हाई कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर प्रशासनिक कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि जिला शिक्षा अधिकारी केवल व्यक्तिगत संतुष्टि के आधार पर किसी कर्मचारी को निलंबित नहीं कर सकते।

कोर्ट ने माना कि आदेश में वैधानिक आधार का अभाव है, इसलिए यह अधिकार क्षेत्र से परे और अवैध है।

शिक्षक की बहाली के आदेश

अदालत ने निलंबन आदेश रद्द करते हुए शिक्षक को सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभागीय जांच लंबित है, तो उसे नियमानुसार जारी रखा जा सकता