सरकार चुनाव कराने से क्यों बच रही है? सचिन पायलट ने पंचायत, निकाय और छात्रसंघ चुनाव पर उठाए बड़े सवाल
सचिन पायलट ने राजस्थान सरकार से पंचायत, नगरपालिका और छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग की। कहा- लोकतंत्र में चुनाव टालना उचित नहीं।
जयपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने शनिवार को जयपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए प्रदेश सरकार से पंचायत, नगरपालिका और छात्रसंघ चुनाव जल्द कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती समय पर चुनाव कराने में है और चुनावों में अनावश्यक देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
लोकतंत्र में चुनाव टालना उचित नहीं
सचिन पायलट ने कहा कि वह हमेशा चुनाव कराने के पक्षधर रहे हैं। उनका मानना है कि जनता और युवाओं को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार समय पर मिलना चाहिए। यदि पंचायत, नगर निकाय और छात्रसंघ चुनाव लंबे समय तक लंबित रहते हैं तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधित्व पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर चुनाव कराने में देरी क्यों हो रही है। यदि कोई प्रशासनिक या कानूनी बाधा है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के चुनाव टालना उचित नहीं माना जा सकता।

छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार पर सवाल
पायलट ने विशेष रूप से छात्रसंघ चुनावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज लोकतंत्र की पहली पाठशाला होते हैं। यहीं से भविष्य के जनप्रतिनिधि और सामाजिक नेतृत्व तैयार होता है। ऐसे में छात्रसंघ चुनावों का नियमित रूप से होना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रसंघ चुनाव कराती है तो छात्रों की वास्तविक भावनाएं सामने आएंगी। युवाओं के बीच बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और अन्य मुद्दों को लेकर जो असंतोष है, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि चुनाव होने पर छात्रों का गुस्सा भी स्पष्ट रूप से सामने आएगा।
पंचायत और नगरपालिका चुनाव भी जल्द कराने की मांग
सचिन पायलट ने पंचायत और नगरपालिका चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। गांवों और शहरों के विकास से जुड़े कई फैसले स्थानीय निकायों के माध्यम से ही लिए जाते हैं। यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं तो विकास कार्यों और जनप्रतिनिधित्व दोनों पर असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि पंचायतों और नगर निकायों में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि समय पर कार्यभार संभालें। चुनावों में देरी से स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
सरकार से किया स्पष्ट सवाल
मीडिया से बातचीत के दौरान पायलट ने सरकार से सीधे सवाल किया कि आखिर चुनाव कराने से परहेज क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के बीच जाने से किसी भी सरकार को नहीं बचना चाहिए। यदि सरकार अपने कामकाज को लेकर आश्वस्त है तो उसे चुनाव कराने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
सचिन पायलट के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में पंचायत, नगरपालिका और छात्रसंघ चुनावों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार चुनावों में देरी को मुद्दा बना रहा है, जबकि अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भी सरकार से जल्द चुनाव कराने की मांग करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी रहेगी।

