Tax Devolution: केंद्र ने राज्यों को दी 1.09 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त, बिहार को मिले 10,845 करोड़ रुपये

Tax Devolution: केंद्र सरकार ने राज्यों को ₹1.09 लाख करोड़ की अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी जारी की। जानें यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश समेत किस राज्य को कितनी राशि मिली।

Tax Devolution: केंद्र ने राज्यों को दी 1.09 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त, बिहार को मिले 10,845 करोड़ रुपये
Tax Devolution

Tax Devolution: केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले राज्यों को बड़ी वित्तीय राहत देते हुए 1.09 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी (Tax Devolution) जारी की है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार, 1 अगस्त 2026 को यह राशि राज्यों के खातों में ट्रांसफर की। यह रकम 10 अगस्त को जारी होने वाली नियमित मासिक किस्त से अलग है।

राज्यों को क्यों जारी की गई अतिरिक्त किस्त?

वित्त मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त फंड जारी करने का उद्देश्य राज्यों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना और उन्हें त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले खर्चों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना है।

इस राशि का उपयोग राज्य सरकारें स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण योजनाओं और अन्य विकास कार्यों पर कर सकेंगी।

क्या है टैक्स शेयरिंग (Tax Devolution)?

भारत में केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए विभाज्य कर राजस्व (Divisible Tax Pool) का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। यह राशि सामान्य तौर पर पूरे वित्त वर्ष के दौरान किस्तों में जारी की जाती है।

इस बार जारी की गई 1.09 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त नियमित मासिक आवंटन के अतिरिक्त है, जिससे राज्यों को समय से पहले अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सके।

किन राज्यों को कितनी राशि मिली?

अतिरिक्त टैक्स हिस्सेदारी के तहत कई राज्यों को बड़ी राशि जारी की गई है। प्रमुख राज्यों को मिली राशि इस प्रकार है—

  • उत्तर प्रदेश: लगभग 19,208 करोड़ रुपये
  • बिहार: लगभग 10,845 करोड़ रुपये
  • मध्य प्रदेश: लगभग 8,010 करोड़ रुपये
  • पश्चिम बंगाल: लगभग 7,866 करोड़ रुपये
  • महाराष्ट्र: लगभग 7,022 करोड़ रुपये

विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त फंड से राज्यों को विकास परियोजनाओं में तेजी लाने, सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले खर्चों का प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। साथ ही राज्यों की वित्तीय जरूरतों को समय पर पूरा करने में भी यह राशि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।