सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, छात्रों की गिरफ्तारी पर रोक, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वालों की रिहाई के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन मामलों में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। 8 राज्यों को नोटिस जारी, नाबालिगों की तत्काल रिहाई और इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, छात्रों की गिरफ्तारी पर रोक, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वालों की रिहाई के निर्देश

देशभर में छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फिलहाल प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने कहा है कि जिन लोगों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्हें हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा किया जाए। कोर्ट ने संकेत दिया कि पूरे मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है।

3 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को तय की है। जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद दिल्ली सहित कई राज्यों में हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए।

आठ राज्यों को नोटिस

कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही इन राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

केंद्र ने कहा- छात्रों को प्रदर्शन का अधिकार

सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ आपराधिक तत्व भी भीड़ में शामिल हो गए थे, जिनमें हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों के आरोपी भी शामिल हैं।

सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। इसमें सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों, विशेष रूप से छात्रों का व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाए।

नाबालिगों की तत्काल रिहाई के निर्देश

अदालत ने पुलिस को दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। बिहार में नाबालिग प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने की शिकायतों पर गंभीर चिंता जताते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि किसी नाबालिग को हिरासत में रखा गया है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उन्हें भी तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया है