जोधपुर से गहलोत का सरकार पर बड़ा हमला: '18 जिलों में अकाल जैसे हालात, भुगतान रुके, कानून-व्यवस्था ध्वस्त'
जोधपुर में अशोक गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, कहा- 18 जिलों में अकाल जैसे हालात, राहत कार्य तुरंत शुरू हों
जोधपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदेश की भजनलाल सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आधा मानसून बीत जाने के बावजूद राजस्थान के कई जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 18 जिलों में अकाल जैसी स्थिति बनती जा रही है। उन्होंने सरकार से समय रहते राहत कार्य शुरू करने और जिला प्रशासन को अलर्ट करने की मांग की।
गहलोत ने कहा कि सरकार को मनुष्यों और मवेशियों के लिए पेयजल, पशुओं के लिए चारे और आम लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अभी से वित्तीय स्वीकृतियां जारी नहीं की गईं तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
'चार अकाल देखे हैं, कोई भूखा नहीं सोने दिया'
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लगातार चार अकालों का सामना किया था, लेकिन उस समय सूखा प्रबंधन पूरे देश में मिसाल बना था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोग से 'काम के बदले अनाज' योजना प्रभावी ढंग से चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में भाजपा नेताओं ने उन पर दिल्ली जाकर "भीख मांगने" का तंज कसा था, लेकिन उन्होंने साफ कहा था कि यदि प्रदेश की जनता को भूखा सोने से बचाने के लिए भीख भी मांगनी पड़े तो उन्हें कोई शर्म नहीं होगी।

भुगतान और पेंशन में देरी का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि राज्य में विभिन्न विभागों के भुगतान रुके हुए हैं और सामाजिक सुरक्षा पेंशन समय पर नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक स्वीकृत हो चुके बिलों को भी दोबारा प्रक्रिया में डालकर भुगतान रोका जा रहा है। उनके मुताबिक रिटायर्ड कर्मचारी अपने जीपीएफ और रिटायरमेंट लाभ के लिए लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री को इन हालातों की जानकारी नहीं है या सरकार मॉनिटरिंग करने में विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर इन मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन सरकार सुझावों को भी गंभीरता से नहीं ले रही।
भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर भी हमला
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं पार हो चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग "चाल, चरित्र और चेहरा" की बात करते थे, आज उन्हीं के शासन में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि दुष्कर्म, डकैती और व्यापारियों पर गोलीबारी जैसी घटनाओं के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
तैयार प्रोजेक्ट भी उद्घाटन का इंतजार कर रहे
गहलोत ने कहा कि कई बड़े सरकारी प्रोजेक्ट तैयार होने के बावजूद शुरू नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने नागौर-मंडोर रोड पर बने लगभग 650 करोड़ रुपये के फिनटेक इंस्टीट्यूट और 80-90 करोड़ रुपये की लागत से बने स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट का उदाहरण देते हुए कहा कि स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में केवल अंतिम औपचारिकताओं के लिए अनुमति चाहिए, लेकिन महीनों से मामला अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि हॉस्टल तैयार होने के बावजूद छात्र बाहर किराए पर रहने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं पर भी उठाए सवाल
गहलोत ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की स्थिति भी लगातार खराब हो रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के समय शुरू की गई योजनाओं को लोग आज याद कर रहे हैं, क्योंकि अब दवाइयों, जांचों और ऑपरेशनों का खर्च बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन में देरी से गरीब और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से आग्रह किया कि वह विपक्ष की बातों को आलोचना नहीं, बल्कि सुशासन के लिए दिए जा रहे फीडबैक के रूप में स्वीकार करे और समय रहते आवश्यक कदम उठाए।

