राजस्थान युवा कांग्रेस के चुनाव, पैसे वालों का खेल !

ये चुनाव अब पैसे वालों का बन गया है, साथ ही डिजिटल ताकत के जरिए नैरेटिव सेट करने की कोशिश की जा रही है।

राजस्थान युवा कांग्रेस के चुनाव, पैसे वालों का खेल !

राजस्थान युवा कांग्रेस के चुनाव अब केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में खुला शक्ति प्रदर्शन बन चुके हैं। डिजिटल प्रक्रिया के दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि चुनावी मैदान में “पावर और पैसा” खुलेआम असर दिखा रहे हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


सदस्यता अभियान से लेकर वोटिंग मैनेजमेंट तक, दावेदार हर हथकंडा अपनाते नजर आ रहे हैं। 25 लाख सदस्य बनाने के लक्ष्य ने इस चुनाव को संसाधनों की होड़ में बदल दिया है। नियमों में भले ही वरिष्ठ नेताओं को दूर रखने की बात कही गई हो, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी सक्रियता और समर्थन की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में गर्म हैं। सोशल मीडिया, खासतौर पर ‘एक्स’ पर माहौल बनाने की होड़ मची है। बड़े फॉलोअर वाले अकाउंट्स के जरिए नैरेटिव सेट करने की कोशिशें हो रही हैं, जबकि पारंपरिक मीडिया में भी प्रचार तेज कर दिया गया है। सवाल ये है कि क्या यह चुनाव विचारधारा का है या फिर महज इमेज और इंफ्लुएंस का खेल बनकर रह गया है?

राजनीतिक के साथ आर्थिक ताकत का बड़ा मंच
सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव का महंगा होना है। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में उतरना आम युवा के बस की बात नहीं रह गई है। भारी खर्च के चलते जमीनी कार्यकर्ता हाशिए पर धकेले जा रहे हैं और चुनाव “पैसे वालों का खेल” बनता जा रहा है। आंकड़े भी इस सच्चाई को बयां करते हैं। अब तक करीब 8.60 लाख सदस्य बन चुके हैं, जिनमें से 4.70 लाख से अधिक शुल्क जमा कर चुके हैं और 3.52 करोड़ रुपए जुट चुके हैं। यदि सदस्यता 25 लाख तक पहुंचती है, तो यह आंकड़ा 18.75 करोड़ रुपए तक जा सकता है। साफ है कि यह चुनाव राजनीतिक के साथ-साथ आर्थिक ताकत का भी बड़ा मंच बन गया है।


Indian Youth Congress एप के जरिए वोटिंग
इस चुनाव में एक सदस्य को अलग-अलग पदों के लिए कुल 6 वोट देने का अधिकार है। प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री, जिलाध्यक्ष से लेकर ब्लॉक स्तर तक ऑनलाइन वोटिंग Indian Youth Congress के एप के जरिए कराई जा रही है। 18 से 35 वर्ष के युवाओं के लिए यह प्रक्रिया खुली है, जिसमें लाइव फोटो, वोटर आईडी और ओटीपी वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है।अंत में, प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सबसे ज्यादा वोट पाने वाले तीन उम्मीदवारों को दिल्ली बुलाकर इंटरव्यू लिया जाएगा, जहां से अंतिम चयन होगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या यह पूरी प्रक्रिया वाकई युवाओं को नेतृत्व दे रही है या फिर पर्दे के पीछे चल रही सियासत ही असली विजेता तय कर रही है?