झालावाड़ में पानी के लिए जंग: टैंक-पाइपलाइन कागजों में, हकीकत में सूखा गांव
Jhalawar के झिरनिया गांव में जल संकट गहराया, Jal Jeevan Mission के दावे सवालों में। एक कुएं पर निर्भर पूरा गांव, जून-जुलाई तक राहत की उम्मीद।
झालावाड़ जिले के झिरनिया गांव से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। श्री कृष्ण सागर तालाब के पास बसे इस गांव में आज भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि कागजों में जल जीवन मिशन के तहत टैंक और पाइपलाइन का काम पूरा दिखाया जा चुका है।
एक कुएं पर टिका पूरा गांव
गांव की पूरी आबादी सिर्फ एक पुराने कुएं पर निर्भर है। सुबह से ही महिलाएं और बच्चे मटके लेकर लाइन में लग जाते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ जलस्तर नीचे चला गया है, जिससे पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो रात में भी लोग पानी के इंतजार में जागते रहते हैं।
पानी बना सामाजिक संकट
पानी की कमी अब गांव के सामाजिक जीवन पर भी असर डाल रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, हालात इतने खराब हैं कि अब लोग यहां रिश्ते करने से भी कतराने लगे हैं। “पानी नहीं तो बेटी नहीं” जैसी स्थिति ने गांव के युवाओं के भविष्य पर भी असर डाल दिया है।
बच्चों की पढ़ाई पर असर, जान का खतरा
स्कूलों में पानी की व्यवस्था नहीं होने से बच्चे पढ़ाई छोड़कर कुएं से पानी भरने जाते हैं। इस दौरान हादसों का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चे पानी भरते समय कुएं में गिर चुके हैं, जिससे डर का माहौल है।
कागजों में विकास, जमीन पर सच्चाई अलग
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कोई सुनवाई नहीं होती। कई बार विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम के बावजूद सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। सवाल यह है कि जब ढांचा तैयार है तो पानी की सप्लाई क्यों शुरू नहीं हो रही।
जून-जुलाई तक उम्मीद
इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि राजगढ़ बांध से पानी की आपूर्ति होनी है, लेकिन काम की रफ्तार धीमी होने के कारण देरी हो रही है। अब अनुमान है कि जून-जुलाई तक गांव में नलों से पानी पहुंच सकता है।
Saloni Kushwaha 
