27 घंटे से पानी की टंकी पर डटे छात्र नेता, जयपुर से उठी अमित शाह के इस्तीफे की मांग; छात्रसंघ चुनाव बहाली पर बढ़ा दबाव
जयपुर में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर एनएसयूआई के तीन छात्र नेता 27 घंटे से पानी की टंकी पर डटे हैं। जानें आंदोलन, शुभम रेवाड़ के अनशन और सचिन पायलट के बयान की पूरी जानकारी।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में छात्र आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। गांधी नगर रेलवे स्टेशन के पास टोंक रोड स्थित रेलवे की ऊंची पानी की टंकी पर राजस्थान विश्वविद्यालय से जुड़े तीन छात्र नेता पिछले 27 घंटे से डटे हुए हैं। एनएसयूआई के राजस्थान विश्वविद्यालय प्रभारी विजयपाल कुड़ी, विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष कोशेन खान और छात्रा प्रतिनिधि वियोना जाट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर टंकी पर चढ़े हुए हैं।
छात्र नेताओं का आरोप है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। उनका कहना है कि इस घटना की जवाबदेही तय होनी चाहिए और केंद्रीय गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने चार वर्षों से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों को तुरंत बहाल करने की मांग दोहराई है।
“पानी खत्म हो गया, कोई अधिकारी मिलने तक नहीं आया”
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विजयपाल कुड़ी का कहना है कि 27 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन या सरकार का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि वे बिना भोजन के टंकी पर बैठे हैं, पीने का पानी भी खत्म हो चुका है और इस दौरान वे नीचे तक नहीं उतरे हैं।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक वार्ता नहीं हुई तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन को केवल जयपुर तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि प्रदेशभर के छात्र संगठनों और युवाओं को जोड़कर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। टोंक रोड जाम करने की भी चेतावनी दी गई है।

मौके पर पुलिस और प्रशासन अलर्ट
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए टंकी के नीचे सुरक्षा जाल लगाया गया है। अधिकारी लगातार छात्रों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे कुछ समय के लिए टोंक रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
शुभम रेवाड़ का अनशन भी बना बड़ा मुद्दा
इसी बीच राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में छात्र नेता शुभम रेवाड़ और वीरेंद्र चौधरी का आंदोलन भी तेज हो गया है। दोनों छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और राजस्थानी भाषा का नियमित विभाग खोलने की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे।
गुरुवार सुबह शुभम रेवाड़ की तबीयत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें अनशन स्थल से हटाकर सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। छात्र समर्थकों ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं अस्पताल पहुंचने के बाद भी शुभम रेवाड़ ने अपना अनशन जारी रखने का ऐलान किया।
सचिन पायलट ने सरकार पर साधा निशाना
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार संवाद करने के बजाय उनकी आवाज को नजरअंदाज कर रही है। पायलट ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए छात्रों से तत्काल बातचीत करने की अपील की।

आखिर क्यों गरमा रहा है छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा?
राजस्थान में वर्ष 2022 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर और प्रशासनिक कारणों के चलते फिलहाल चुनाव कराना संभव नहीं है। यही पक्ष सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष भी रखा है।
दूसरी ओर छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार चार वर्षों तक चुनाव नहीं कराना युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उनका आरोप है कि सरकार छात्र नेतृत्व को उभरने से रोक रही है।
छात्र राजनीति से निकले हैं राजस्थान के कई बड़े नेता
राजस्थान की छात्र राजनीति का इतिहास काफी समृद्ध रहा है। वर्ष 1967 से शुरू हुई छात्रसंघ चुनाव की परंपरा ने प्रदेश को कई बड़े राजनीतिक चेहरे दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, हनुमान बेनीवाल, राजेंद्र राठौड़, रघु शर्मा, अशोक लाहौटी, महेंद्र चौधरी और रविंद्र सिंह भाटी जैसे कई नेताओं ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। यही वजह है कि छात्रसंघ चुनावों को प्रदेश की राजनीति की सबसे बड़ी लीडरशिप लैब माना जाता है।
राजस्थान विश्वविद्यालय में आखिरी छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2022 में हुए थे, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार निर्मल चौधरी अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 2023, 2024, 2025 और अब 2026 में भी चुनाव नहीं कराए गए। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में छात्रसंघ चुनाव कराने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक इस दिशा में कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
अब आगे क्या?
जयपुर में पानी की टंकी पर जारी यह विरोध प्रदर्शन और विश्वविद्यालय में चल रहा अनशन अब प्रदेश की छात्र राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि सरकार और छात्र नेताओं के बीच जल्द कोई सकारात्मक बातचीत नहीं होती, तो आंदोलन के पूरे राजस्थान में फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि सरकार संवाद का रास्ता चुनती है या छात्र आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेता है।

