ITR Filing Last Date 2026: इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए बचे सिर्फ 3 दिन, ये 10 गलतियां पड़ सकती हैं भारी
ITR Filing Last Date 2026: 31 जुलाई 2026 ITR फाइल करने की आखिरी तारीख है। जानें लेट फीस, सही ITR फॉर्म, AI जांच, ई-वेरिफिकेशन और रिटर्न भरते समय ध्यान रखने वाली 10 जरूरी बातें।
ITR Filing Last Date 2026: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख अब बेहद करीब है। सामान्य करदाताओं के लिए 31 जुलाई 2026 तक ITR फाइल करना अनिवार्य है, जबकि कुछ बिजनेस कैटेगरी (ITR-3 और ITR-4) के करदाताओं के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
यदि 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं किया जाता है, तो 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित लेट फीस का भुगतान करना होगा।
AI के जरिए आपकी जानकारी की जांच करता है आयकर विभाग
आयकर विभाग अब AI, डेटा एनालिटिक्स, AIS, TIS, Form 26AS, बैंकिंग रिकॉर्ड, TDS, शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और विदेशी निवेश जैसी जानकारियों का मिलान ITR में दी गई जानकारी से करता है। ऐसे में छोटी सी गलती भी टैक्स डिमांड, ब्याज या पेनाल्टी का कारण बन सकती है।

ITR भरते समय इन 10 बातों का रखें विशेष ध्यान
1. केवल Form 16 पर निर्भर न रहें
Form 16 में सिर्फ सैलरी और TDS की जानकारी होती है। यदि आपको FD, RD, सेविंग अकाउंट का ब्याज, डिविडेंड, किराया, फ्रीलांस आय, शेयर, म्यूचुअल फंड या विदेशी आय हुई है तो उसे भी ITR में शामिल करें।
2. सही ITR फॉर्म चुनें
गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है।
- ITR-1: सैलरी, पेंशन और सामान्य ब्याज आय वाले
- ITR-2: कैपिटल गेन, एक से अधिक मकान या विदेशी संपत्ति वाले
- ITR-3: बिजनेस, फ्रीलांस, F&O या ट्रेडिंग करने वाले
- ITR-4: छोटे कारोबारी और प्रोफेशनल्स
3. AIS, TIS और Form 26AS का मिलान करें
रिटर्न भरने से पहले इन सभी दस्तावेजों की जानकारी का मिलान करें। यदि कोई गलती मिले तो पोर्टल पर सुधार के लिए अनुरोध दर्ज करें।
4. नौकरी बदलने पर दोनों कंपनियों की आय जोड़ें
यदि वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है, तो पुराने और नए दोनों नियोक्ताओं से मिली सैलरी को जोड़कर ही ITR दाखिल करें।
5. बैंक खाते की जानकारी सही भरें
रिफंड प्राप्त करने वाले बैंक खाते का अकाउंट नंबर और IFSC कोड सही दर्ज करें, ताकि रिफंड में देरी न हो।

6. ब्याज आय छिपाने की गलती न करें
FD, RD, सेविंग अकाउंट या बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज भी टैक्स के दायरे में आ सकता है। इसे छिपाने पर बाद में नोटिस मिल सकता है।
7. शेयर, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी की बिक्री की जानकारी दें
शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति बेचने से हुए लाभ या नुकसान का पूरा विवरण ITR में दर्ज करें।
8. टैक्स कटौती (Deduction) का सही दावा करें
धारा 80C, 80D, NPS और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियों का दावा तभी करें जब आपके पास संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हों।
9. विदेशी आय और निवेश का खुलासा करें
यदि आपके पास विदेशी बैंक खाता, शेयर, ETF या अन्य विदेशी निवेश है, तो उसका विवरण नियमों के अनुसार देना जरूरी हो सकता है।
10. ITR दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूर करें
रिटर्न सबमिट करने के बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग, डिमैट अकाउंट या डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से ई-वेरिफिकेशन अवश्य करें। बिना ई-वेरिफिकेशन के रिटर्न मान्य नहीं माना जाएगा।
31 जुलाई के बाद कितनी लगेगी लेट फीस?
यदि आप अंतिम तिथि के बाद ITR दाखिल करते हैं, तो आय के आधार पर लेट फीस देनी होगी।
- वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक: ₹5,000 लेट फीस
- वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक: ₹1,000 लेट फीस
समय सीमा के भीतर ITR दाखिल करने से न केवल जुर्माने से बचा जा सकता है, बल्कि रिफंड मिलने की प्रक्रिया भी तेज होती है और भविष्य में किसी भी तरह की टैक्स संबंधी परेशानी की संभावना कम रहती है।

