Border Security Alert: श्रीगंगानगर में सेना की वर्दी का अवैध कारोबार पकड़ा गया, दिल्ली तक पहुंची जांच
श्रीगंगानगर में आर्मी इंटेलिजेंस और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सेना की डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म जैसा 1000 मीटर से अधिक कपड़ा जब्त, नेटवर्क की जांच जारी।
श्रीगंगानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे श्रीगंगानगर जिले में सेना की नई डिजिटल पैटर्न कॉम्बैट यूनिफॉर्म से मिलते-जुलते कपड़े की अवैध बिक्री का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। आर्मी इंटेलिजेंस की सूचना पर दिल्ली और राजस्थान में संयुक्त अभियान चलाया गया, जिसमें बिना अनुमति सेना की वर्दी जैसा कपड़ा बेचने और सप्लाई करने वाले नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार यह प्रतिबंधित कपड़ा दिल्ली के आजाद मार्केट से श्रीगंगानगर लाया जा रहा था। बताया गया कि वहां बड़ी संख्या में दुकानें सेना की वर्दी से मिलता-जुलता कपड़ा बेच रही थीं। जांच के बाद श्रीगंगानगर में कोतवाली पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने रेलवे स्टेशन रोड सहित कई प्रमुख बाजारों में छापेमारी की।

कार्रवाई के दौरान सेना की नई डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म से मिलता-जुलता कपड़ा, सैन्य उपयोग से जुड़े जूते, कैप, फीते और अन्य सामग्री जब्त की गई। अधिकारियों के अनुसार एक हजार मीटर से अधिक संदिग्ध कॉम्बैट फैब्रिक बरामद किया गया है। कई दुकानों की जांच की गई और संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दुकानदार बिना किसी वैध लाइसेंस के इस प्रतिबंधित कपड़े की बिक्री कर रहे थे। पूछताछ में सप्लाई चेन के कई अहम लिंक सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ है।
आर्मी इंटेलिजेंस का मानना है कि सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में सेना की वर्दी जैसा कपड़ा खुले बाजार में उपलब्ध होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। आशंका जताई जा रही है कि ऐसे कपड़ों का इस्तेमाल असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व गलत तरीके से कर सकते हैं। इसी कारण इस पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
भारतीय सेना ने वर्ष 2022 में नई डिजिटल कैमोफ्लाज कॉम्बैट यूनिफॉर्म लागू की थी। इस यूनिफॉर्म के डिजाइन और पैटर्न का बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) सेना के पास सुरक्षित है। नियमों के अनुसार इस पैटर्न की वर्दी या कपड़े का निर्माण और बिक्री केवल अधिकृत व्यवस्था के तहत ही की जा सकती है। खुले बाजार में इसकी बिक्री प्रतिबंधित है।
सुरक्षा एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य शहरों और कारोबारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जब्त किए गए सामान और सप्लाई चेन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच जारी है।

