अतिक्रमणकारियों के आगे घुटने टेकने को मजबूर प्रशासन, यातायात पुलिस-नगरपालिका मौन
सूरतगढ़ शहर के दिल कहे जाने वाले महाराणा प्रताप चौक और मुख्य बाजार क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों की मनमानी चरम पर है। फुटपाथ से लेकर सड़क तक पर दुकानदारों ने स्थायी कब्जा जमा रखा है।
सूरतगढ़। शहर के दिल कहे जाने वाले महाराणा प्रताप चौक और मुख्य बाजार क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों की मनमानी चरम पर है। फुटपाथ से लेकर सड़क तक पर दुकानदारों ने स्थायी कब्जा जमा रखा है, जिससे न तो पैदल चलने वालों के लिए जगह बची है और न ही वाहन खड़े करने की। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ठीक चौक के पास ही पास ट्रैफिक पुलिस चौकी मौजूद है और नगरपालिका कार्यालय भी कुछ ही दूरी पर है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग फुटपाथ की बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जिससे हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। दोपहिया-चार पहिया वाहन सड़क पर ही खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति पूरे दिन बनी रहती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर दुर्घटना या आग जैसी आपात स्थिति में एम्बुलेंस या दमकल वाहन कैसे निकल पाएंगे?
नागरिकों में भारी आक्रोश है। उनका सीधा आरोप है कि प्रशासन की खामोशी और निष्क्रियता से अतिक्रमणकारियों को खुला संरक्षण मिल रहा है। कई लोग तो यहाँ तक कह रहे हैं कि “प्रशासन का इनके सिर पर हाथ है, इसलिए कोई डर नहीं है।”
नगरपालिका और यातायात पुलिस दोनों ही इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो कोई नोटिस जारी हुआ और न ही कोई बुलडोजर चला। लोगों का कहना है कि शायद कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी।
स्थानीय व्यापारियों में भी दो फाड़ नजर आ रहे हैं – एक पक्ष अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहा है ताकि शहर सुचारु रूप से चल सके, जबकि दूसरा पक्ष चुपचाप फायदा उठा रहा है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस जनआक्रोश को गंभीरता से लेगा या फिर एक और बड़ी दुर्घटना का इंतजार करेगा।

