वागड़ में कांग्रेस की रणनीति से मजबूत हो रहे राजकुमार रोत? मालवीय की वापसी पर उठे नए सवाल
महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी के बाद वागड़ की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। राजनीतिक चर्चाओं के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस की रणनीति का सबसे बड़ा फायदा भारत आदिवासी पार्टी और सांसद राजकुमार रोत को मिल रहा है?
राजस्थान के वागड़ क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि इससे कांग्रेस का संगठन मजबूत होगा। हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मालवीय की वापसी से कांग्रेस में क्या बदला?
कांग्रेस में लौटने के बाद महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। दावा किया गया कि बड़ी संख्या में लोग कांग्रेस में शामिल हुए। हालांकि सांसद राजकुमार रोत ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों को नया शामिल बताया जा रहा है, वे पहले कांग्रेस से भाजपा गए थे और अब वापस लौटे हैं। ऐसे में भारत आदिवासी पार्टी को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं हुआ।
कांग्रेस के भीतर भी उठे सवाल
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि वागड़ में कांग्रेस के सक्रिय स्थानीय नेताओं की मेहनत पर इस घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। संगठन में लंबे समय से काम कर रहे नेताओं के बीच भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कांग्रेस नहीं हुई मजबूत तो राजकुमार रोत को मिलेगा फायदा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आदिवासी मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहने के कारण राजकुमार रोत की राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ी है। मानगढ़ धाम, आदिवासी अधिकार और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता उन्हें अलग पहचान देती है। ऐसे में यदि कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने में सफल नहीं होती, तो इसका राजनीतिक लाभ भारत आदिवासी पार्टी को मिल सकता है।
2028 पर टिकी नजर
वागड़ की राजनीति आने वाले विधानसभा चुनावों में राजस्थान की बड़ी तस्वीर को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे, लेकिन इतना तय है कि इस क्षेत्र में कांग्रेस, भाजपा और भारत आदिवासी पार्टी के बीच मुकाबला और दिलचस्प होने वाला है।

