जयपुर में टंकी बनी आंदोलन का नया मंच! 3 नीचे उतरे तो 2 फिर चढ़े, नर्सिंगकर्मियों का प्रदर्शन जारी

Jaipur Nursing Workers Protest: जयपुर में संविदा नर्सिंगकर्मी मांगों को लेकर पानी की टंकी पर चढ़े। नर्सिंग ऑफिसर और ANM भर्ती में बोनस अंक देने की मांग, सोमवार को सरकार से बातचीत।

जयपुर में टंकी बनी आंदोलन का नया मंच! 3 नीचे उतरे तो 2 फिर चढ़े, नर्सिंगकर्मियों का प्रदर्शन जारी
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जयपुर में अपनी मांगों को लेकर संविदा नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां पानी की टंकी प्रदर्शन की जगह से ज्यादा ‘आंदोलन के मंच’ के तौर पर नजर आने लगी है। एक टंकी से तीन नर्सिंगकर्मी नीचे उतरे ही थे कि कुछ घंटे बाद दो अन्य नर्सिंगकर्मी दूसरी पानी की टंकी पर चढ़ गए। यानी आंदोलन खत्म होने के बजाय टंकी बदल गई।

शनिवार रात करीब 9:10 बजे दो संविदा नर्सिंगकर्मी एसएमएस अस्पताल परिसर स्थित चरक भवन की पानी की टंकी पर चढ़ गए। इससे पहले जयपुरिया अस्पताल के पीछे वाली टंकी पर एक महिला समेत तीन संविदा नर्सिंगकर्मी मौजूद थे। प्रशासन की समझाइश के बाद तीनों नीचे उतर आए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

एक टंकी से उतरे, दूसरी पर चढ़ गए

जयपुरिया अस्पताल के पीछे से तीन नर्सिंगकर्मी नीचे उतरे तो रात होते-होते चरक भवन की टंकी पर दो नए प्रदर्शनकारी पहुंच गए। इसे देखकर यही सवाल उठ रहा है कि जयपुर में अब मांगों की आवाज उठाने के लिए धरना स्थल कम और पानी की टंकियां ज्यादा पड़ रही हैं?

टंकी पर चढ़े रामभरत और भरतलाल मीणा का आरोप है कि पुलिस ने पहले टंकी पर चढ़े उनके साथियों और उनके परिवारों पर दबाव बनाया, जिसके बाद उन्हें नीचे उतारा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांग पर कायम हैं।

आखिर मांग क्या है?

संविदा नर्सिंगकर्मी नर्सिंग ऑफिसर और ANM की आगामी भर्ती में मेरिट के साथ बोनस अंकों के आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक संविदा पर काम किया है और अब भर्ती प्रक्रिया में उनके अनुभव और सेवा अवधि को महत्व दिया जाना चाहिए।

उनका आरोप है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता नहीं मिल रही है।

‘टंकी पर चढ़ना’ क्यों बन रहा है आंदोलन का तरीका?

जयपुर में पानी की टंकियों पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन कोई नई तस्वीर नहीं है। कभी छात्र, कभी बेरोजगार और अब संविदा कर्मचारी—अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए ऊंचाई का सहारा लेते दिखाई दे रहे हैं।

विडंबना यह है कि नीचे खड़े प्रशासन के सामने ऊपर बैठे प्रदर्शनकारियों को मनाने की चुनौती होती है। बातचीत के लिए अधिकारी ऊपर देखते हैं और प्रदर्शनकारी समाधान के लिए नीचे सरकार की ओर देखते हैं।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या मांगों को सुनने के लिए हर बार किसी को टंकी पर चढ़ना जरूरी है?

सोमवार को होगी सरकार से बातचीत

मामले को लेकर सोमवार को संविदा नर्सिंगकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से कराए जाने की बात सामने आई है।

अब निगाह इस बैठक पर है। नर्सिंगकर्मियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी भर्ती और बोनस अंकों से जुड़ी मांग पर कोई स्पष्ट रुख सामने रखेगी।

फिलहाल जयपुर में एक सवाल चर्चा में है—मांगें पूरी कराने के लिए आखिर टंकी ही क्यों बन रही है सबसे बड़ा मंच?