राजस्थान में फिर नहीं खिलेगा ‘कमल’, लाठीचार्ज के बाद बोले महिपाल सिंह मकराना, खाई कसम!

UGC के प्रस्तावित नियमों के विरोध में निकली श्री राजपूत करणी सेना की 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' को जयपुर में प्रशासन ने रोक दिया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने आगामी चुनाव में बीजेपी को वोट नहीं देने की बात कही।

राजस्थान में फिर नहीं खिलेगा ‘कमल’, लाठीचार्ज के बाद बोले महिपाल सिंह मकराना, खाई कसम!

जयपुर... जहां हर दिन कई रैलियां निकाली जाती हैं लेकिन इस बार सवाल किसी रैली का नहीं... उस रुकावट का है, जिसने राजनीति की दिशा पर नई चर्चा छेड़ दी। कुछ दिनों पहले श्री राजपूत करणी सेना ने देशनोक से 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' शुरू की। जो UGC के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की थी. जो लगभग 600 किमी की यात्रा करने के बाद जयपुर पहुंची। जहां कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपना था लेकिन राजधानी की दहलीज पर पैर रखते ही तस्वीर बदल गई। 

लाठीचार्ज के बाद महिपाल और आंदोलनकारी ने खाई कसम

प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए यात्रा को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी और 200 फीट बाइपास पर ही रोक दिया. बाद में श्री राजपूत करणी सेना के आंदोलनकारी और पुलिस आमने सामने हुए। जहां पुलिस ने आंदोलनकारी पर लाठीचार्ज किया। इसके बाद सवाल सिर्फ इतना नहीं रह गया कि यात्रा क्यों रुकी...लाठीचार्ज क्यों हुआ। बल्कि यह बन गया कि आखिर सरकार किस बात से सतर्क थी? यात्रा का नेतृत्व कर रहे श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने मंच से कहा जिस तरह का व्यवहार सरकार द्वारा हमारे साथ किया गया है। उसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनावों में भुगतान होगा इसकी आज हम कसम खाते हैं।  

चुनावों से पहले बदलेगी राजस्थान में हवा ? 

यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है। एक तरफ सरकार कानून-व्यवस्था की बात कर रही है, दूसरी तरफ आंदोलनकारी इसे अपनी आवाज रोकने की कोशिश बता रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला था... या फिर उस भीड़ से पैदा होने वाले राजनीतिक संदेश को सीमित करने की कोशिश? क्योंकि चुनावों से पहले जब कोई संगठन भारी भीड़ के बीच खुले मंच से वोट की दिशा बदलने की बात करता है, तो उसकी गूंज सिर्फ उन लोगों तक नहीं रहती... वह राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंचती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार UGC के प्रस्तावित नियमों को लेकर उठी इस नाराजगी पर कोई प्रतिक्रिया देगी?... क्या करणी सेना अपना आंदोलन और तेज करेगी... और सबसे बड़ा सवाल. क्या जयपुर की सीमा पर रोकी गई यह यात्रा आने वाले चुनावों की राजनीति में भी कोई नई राह बनाएगी... या फिर यह विरोध यहीं थम जाएगा? 

अब आगे क्या...?

 

जयपुर में यात्रा रोके जाने और महिपाल मकराना के चुनावी बयान के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक चर्चाओं को भी तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और करणी सेना अपनी अगली रणनीति क्या तय करती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ यूजीसी के प्रस्तावित नियमों तक सीमित रहेगा या फिर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भी असर डालेगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।