Naresh Meena Surrender: टोंक पहुंचे नरेश मीणा, SDM थप्पड़कांड में नगरफोर्ट थाने में करेंगे सरेंडर, भारी पुलिस बल तैनात
Naresh Meena Surrender: देवली-उनियारा SDM थप्पड़कांड मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा नगरफोर्ट थाने में सरेंडर के लिए पहुंचे। टोंक में भारी पुलिस बल तैनात, जानिए पूरा मामला।
Naresh Meena Surrender: टोंक के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुए चर्चित एसडीएम थप्पड़कांड मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा गुरुवार को सरेंडर के लिए टोंक जिले के नगरफोर्ट पहुंचे। वे समर्थकों के काफिले के साथ जयपुर से रवाना हुए और अब नगरफोर्ट थाने में आत्मसमर्पण करेंगे। उनके पहुंचने से पहले ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया।
जयपुर से टोंक तक समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन
नरेश मीणा गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे जयपुर से अपने समर्थकों के साथ रवाना हुए। जयपुर-कोटा हाईवे पर जगह-जगह समर्थकों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनके समर्थन में नारे लगाए। बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
नगरफोर्ट में हाई अलर्ट, भारी पुलिस बल तैनात
नगरफोर्ट थाना परिसर और आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोंक, देवली और नगरफोर्ट में मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। एडीएम विनोद कुमार मीणा के अनुसार, टोंक, देवली और उनियारा क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है, जिसके तहत भीड़ एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा।
जमानत रद्द होने के बाद सरेंडर
नरेश मीणा को पहले राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी, लेकिन जमानत की शर्तों के कथित उल्लंघन के आधार पर एससी-एसटी कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद उन्हें दोबारा सरेंडर करना पड़ रहा है।
क्या है एसडीएम थप्पड़कांड?
13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव के लोगों ने क्षेत्रीय मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे।
आरोप है कि मतदान को लेकर हुए विवाद के दौरान तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को नरेश मीणा ने थप्पड़ मार दिया था। अगले दिन पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया और 15 नवंबर 2024 को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया। इस मामले में 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में अन्य सभी आरोपियों को जमानत मिल गई, जबकि नरेश मीणा को करीब नौ महीने बाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी।
पिपलोदी स्कूल हादसे के बाद फिर हुई थी गिरफ्तारी
25 जुलाई 2025 को झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल हादसे में सात बच्चों की मौत के बाद नरेश मीणा एसआरजी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। बाद में नगरफोर्ट थाना पुलिस की ओर से दायर आवेदन पर एससी-एसटी कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी थी।
अब नगरफोर्ट थाने में उनके सरेंडर के साथ इस चर्चित मामले की कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है

