स्कूल ठीक नहीं कर सकते तो कैमरे पर लगा दी पाबंदी, कब तक छिपाओगे गलतियां?

सचिन पायलट ने कहा, “सरकार स्कूल में आने से मना करती है, फोटो खींचने से मना करती है। मतलब अपनी गलती छिपाने के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं।”

स्कूल ठीक नहीं कर सकते तो कैमरे पर लगा दी पाबंदी, कब तक छिपाओगे गलतियां?

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूल परिसरों में मीडिया कवरेज से जुड़े नए नियमों को लेकर भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला। पायलट ने कहा कि सरकार को स्कूलों की इमारत, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की कमी दूर करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि कमियों को सामने आने से रोकने पर। उन्होंने निकाय-पंचायत चुनाव, UCC और दिल्ली में युवाओं पर हुई कार्रवाई को लेकर भी भाजपा को घेरा। राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूल परिसरों में मीडिया तथा बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर जारी निर्देशों पर सियासी घमासान तेज हो गया है।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने गुरुवार को इस मुद्दे पर भजनलाल सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों की कमियां दूर करने के बजाय उन्हें सामने आने से रोकने की कोशिश कर रही है। मीडिया से बातचीत में पायलट ने कहा कि स्कूलों में प्रवेश, फोटो और वीडियो को लेकर पाबंदियां लगाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। सरकार की पहली प्राथमिकता स्कूल भवनों की स्थिति सुधारना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होनी चाहिए। पायलट ने कहा, “सरकार स्कूल में आने से मना करती है, फोटो खींचने से मना करती है। मतलब अपनी गलती छिपाने के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं।”

स्कूल की छतें ठीक कराइए, कमियां दिखाने वालों को मत रोकिए

सचिन पायलट ने स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कई जगह स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं और बारिश के दौरान छतों तथा इमारतों की सुरक्षा को लेकर घटनाएं सामने आई हैं। सरकार को सबसे पहले क्लासरूम, स्कूल परिसर, बच्चों की सुरक्षा और भोजन जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं पर ध्यान देना चाहिए। पायलट ने झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से बच्चों की मौत की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार ऐसा माहौल बना रही है जिसमें पत्रकारों और दूसरे लोगों के लिए स्कूलों के अंदर जाकर वास्तविक स्थिति सामने लाना मुश्किल हो जाए। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूलों में प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी संबंधी निर्देशों का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा, निजता और गरिमा की रक्षा करना है।

हाई कोर्ट के आदेश का भी किया जिक्र

पायलट ने राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से स्कूल भवनों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर की गई टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को स्कूलों की स्थिति सुधारने पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी यही चाहता है कि सरकार की जवाबदेही तय हो। पायलट ने कहा, “कभी दरवाजे बंद कर दो, कभी पाबंदी लगा दो, मीडिया को मना कर दो, मोबाइल और कैमरा ले जाने से रोक दो। इससे सरकार की जवाबदेही खत्म नहीं होगी।” उन्होंने दावा किया कि सरकार इस मुद्दे पर बैकफुट पर है और विधानसभा में विपक्ष उससे जवाब मांगेगा।

'ना जवाब है, ना फंड है, ना नीयत'

सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई जगह विद्यार्थी शिक्षकों और बुनियादी व्यवस्थाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान खोले गए कुछ स्कूलों को बंद या मर्ज किए जाने के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को घेरा। पायलट ने कहा, “सरकार बौखलाई हुई है। ना जवाब है, ना फंड है और ना नीयत है। अगर सरकार अपनी प्राथमिकताएं तय करे तो सुधार हो सकता है, लेकिन सरकार करना नहीं चाहती।”

निकाय चुनाव पर बोले- 'शहरी सरकार कांग्रेस की बनेगी'

सचिन पायलट ने आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर भी कांग्रेस की तैयारियों का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता, कार्यकर्ता, प्रभारी और पदाधिकारी चुनावों को लेकर बैठकें कर चुके हैं और कांग्रेस पूरी तरह तैयार है। पायलट ने कहा कि पार्टी स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी संख्या में युवाओं को मौका देना चाहती है। उन्होंने दावा किया, “हमारी पार्टी पूरी तरह तैयार है। हम बहुत से नौजवानों को मौका देना चाहते हैं और अच्छे बहुमत के साथ शहरी सरकार कांग्रेस की बनेगी।” इसके साथ ही उन्होंने पंचायत चुनाव में देरी को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा और सरकार की स्थानीय चुनाव नीति पर सवाल उठाए।

दिल्ली की घटना पर केंद्र सरकार को घेरा

पायलट ने दिल्ली में युवाओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई में घायल हुए युवाओं के मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। पायलट ने सवाल किया कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन आती है, इसलिए सरकार को संसद में इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चर्चा चाहता रहा, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की तरफ से अपेक्षित जवाब नहीं आया।

UCC पर भी पायलट का हमला

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के सवाल पर सचिन पायलट ने भाजपा की सोच पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग धर्मों, समाजों, समुदायों, परंपराओं और रीति-रिवाजों वाला देश है। पूर्वोत्तर राज्यों से लेकर राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों तक अलग-अलग समुदायों की अपनी सामाजिक परंपराएं हैं। पायलट ने आरोप लगाया कि भाजपा “एक सोच और एक विचारधारा” थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने UCC की बहस को स्कूलों जैसे बुनियादी मुद्दों से भी जोड़ा और कहा कि सरकार को पहले जनता से सीधे जुड़े सवालों का समाधान करना चाहिए। पायलट ने कहा कि जब स्कूलों की छत और बुनियादी व्यवस्थाएं तक दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं, तब समाज और धर्म से जुड़े मुद्दों को आगे कर वास्तविक समस्याओं से ध्यान नहीं भटकाया जाना चाहिए।

स्कूलों पर अब बढ़ सकती है सियासी लड़ाई

सचिन पायलट का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस पहले ही सरकारी स्कूलों में मीडिया कवरेज और प्रवेश संबंधी निर्देशों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक जयपुर के पोद्दार स्कूल पहुंचे और वहां से विधानसभा तक मार्च भी किया। अब पायलट के खुलकर इस मुद्दे पर उतरने के बाद कांग्रेस के पास सरकार को घेरने के लिए एक और बड़ा चेहरा सामने आ गया है। सरकार नियमों को बच्चों की सुरक्षा और निजता से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकारी स्कूलों की जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर असली बहस इसी सवाल पर तेज हो सकती है। स्कूलों में बच्चों की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र निगरानी और जवाबदेही कैसे कायम रखी जाए?