Kishau Project: किशाऊ बांध से राजस्थान के 3 जिलों को मिलेगा पानी, जानें कैसे पहुंचेगा शेखावाटी तक
किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना के एमओयू के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं को पानी मिलने का रास्ता तैयार हुआ है। टोंस नदी के पानी को पाइपलाइन के जरिए शेखावाटी तक पहुंचाने की योजना है।
Kishau Project: राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल संकट से राहत की उम्मीद बढ़ी है। यमुना जल समझौते के बाद अब किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर हुए एमओयू से सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों को पानी मिलने का रास्ता तैयार हुआ है। परियोजना के तहत टोंस नदी के पानी को पाइपलाइन के जरिए राजस्थान तक पहुंचाने की योजना है।
किशाऊ परियोजना को लेकर नई दिल्ली में एमओयू हुआ है। इसमें केंद्र सरकार के साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली की भागीदारी है।
उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर बनेगा किशाऊ बांध
किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है।
परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपए बताई गई है। इससे लगभग 660 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन का प्रस्ताव है। परियोजना से राजस्थान के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को भी लाभ मिलने की बात कही गई है।
राजस्थान को मिलेगा 124 MCM पानी
परियोजना के तहत राजस्थान के हिस्से में 124 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी आने का प्रस्ताव है। इस पानी को तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के जरिए हरियाणा की हांसी-बुटाना प्रणाली से जोड़ते हुए चूरू तक पहुंचाने की योजना है।
इसके बाद यह पानी सीकर, चूरू और झुंझुनूं सहित शेखावाटी के आसपास के क्षेत्रों की पेयजल और अन्य आवश्यकताओं में उपयोग किया जा सकेगा।
केंद्र सरकार देगी जल घटक की 90 प्रतिशत सहायता
एमओयू के अनुसार संशोधित व्यवस्था में हिमाचल प्रदेश के आवंटित जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले संबंधित राज्य हिमाचल प्रदेश से जुड़े बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे।
जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार सहायता के रूप में देगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत का योगदान भागीदार राज्यों की ओर से किया जाएगा। परियोजना का संचालन किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
यमुना जल के लिए 2024 में हुआ था समझौता
शेखावाटी के तीन जिलों में यमुना का पानी लाने के लिए 17 फरवरी 2024 को राजस्थान और हरियाणा के बीच समझौता हुआ था। इसमें ताजेवाला हेड यानी हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक पानी पहुंचाने के लिए संयुक्त रूप से डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी थी।
यमुना जल परियोजना के तहत हथिनीकुंड बैराज से चूरू के हासियावास तक करीब 265 किलोमीटर लंबी तीन समानांतर पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव है। इसके जरिए चूरू, सीकर और झुंझुनूं को कुल 577 MCM पानी मिलने की योजना बताई गई है।
1994 के समझौते से जुड़ी है योजना
राजस्थान समेत पांच राज्यों के बीच 12 मई 1994 को यमुना जल समझौता हुआ था। इसमें मानसून अवधि के दौरान हथिनीकुंड से राजस्थान के लिए 1,917 क्यूसेक पानी आवंटित किया गया था।
समझौते के अनुसार पानी का हिस्सा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के बीच निर्धारित किया गया था। लंबे समय से लंबित इस व्यवस्था को अब विभिन्न परियोजनाओं और नए समझौतों के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
किशाऊ परियोजना और यमुना जल योजना के जरिए शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनूं में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने की योजना है। हालांकि परियोजना का वास्तविक लाभ पानी की उपलब्धता, निर्माण कार्य और पाइपलाइन प्रणाली के पूरा होने के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा।

