राजस्थान में BJP का ‘Triple Engine’! जयपुर-जोधपुर-कोटा में मेयर, भजनलाल सरकार के लिए निकाय चुनाव में बड़ी बढ़त

Rajasthan Mayor Election Result 2026: जयपुर में सुनील कोठारी, जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता और कोटा में अनुसुईया गोस्वामी मेयर चुनी गईं।

राजस्थान में BJP का ‘Triple Engine’! जयपुर-जोधपुर-कोटा में मेयर, भजनलाल सरकार के लिए निकाय चुनाव में बड़ी बढ़त

राजस्थान के तीन बड़े शहरों में मेयर चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में बीजेपी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। तीनों प्रमुख शहरों में एक साथ बीजेपी के मेयर बनने से पार्टी खेमे में उत्साह है, वहीं कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों और चुनावी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

राजधानी जयपुर में बीजेपी के सुनील कोठारी ने मेयर पद का चुनाव जीत लिया। उन्हें 89 वोट मिले। इसके साथ ही जयपुर नगर निगम की कमान बीजेपी के हाथ में आ गई। राजधानी में यह नतीजा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जयपुर प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।

जोधपुर में भी BJP का परचम

जोधपुर में बीजेपी के प्रसन्न मेहता ने मेयर पद का चुनाव जीतकर कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को पीछे छोड़ दिया। प्रसन्न मेहता को 53 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 47 वोट हासिल हुए। बहुमत का आंकड़ा 51 वोट था।

जोधपुर के नतीजे में मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा, लेकिन अंतिम तस्वीर बीजेपी के पक्ष में रही। वोटिंग के बाद परिणाम सामने आते ही बीजेपी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल देखने को मिला।

कोटा में 65 वोट के साथ अनुसुईया गौस्वामी की जीत

कोटा में बीजेपी की अनुसुईया गौस्वामी ने मेयर पद पर जीत दर्ज की। उन्हें 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की सुनीता सुमन को 35 वोट हासिल हुए।

कोटा का परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि यहां कांग्रेस के चार पार्षदों के बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आई। इस घटनाक्रम ने मेयर चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया।

तीन शहरों में एक साथ BJP के मेयर

जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजों को एक साथ देखें तो बीजेपी ने राजस्थान के तीन प्रमुख नगर निगमों में मेयर पद हासिल कर लिया है। पार्टी के लिए यह नतीजा इसलिए अहम है क्योंकि ये तीनों शहर राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

बीजेपी इस परिणाम को स्थानीय निकाय स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ के तौर पर देख सकती है, जबकि कांग्रेस के लिए नतीजों में संगठन और पार्षदों के बीच तालमेल का सवाल प्रमुख बनकर सामने आया है।

‘Triple Engine’ की चर्चा क्यों?

इन नतीजों के बाद बीजेपी के लिए ‘Triple Engine’ का सियासी नैरेटिव भी चर्चा में आ सकता है—राज्य में बीजेपी की सरकार और अब जयपुर, जोधपुर व कोटा जैसे तीन बड़े शहरों में पार्टी के मेयर।

हालांकि, नगर निगम के मेयर चुनाव स्थानीय निकाय की राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इनके नतीजों को सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना अलग विषय है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तीन बड़े नगर निगमों की कमान बीजेपी के पास पहुंच गई है।

कांग्रेस के सामने संगठन और रणनीति की चुनौती

तीनों शहरों में बीजेपी की जीत के बाद कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों के बीच समन्वय और संगठनात्मक रणनीति को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। खासतौर पर कोटा में क्रॉस वोटिंग का घटनाक्रम पार्टी के लिए अलग से चर्चा का विषय बना हुआ है।

वहीं बीजेपी के लिए तीनों नगर निगमों में मेयर पद हासिल करना स्थानीय राजनीति में अपनी स्थिति को मजबूत करने वाला घटनाक्रम है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नई मेयर टीमें अपने-अपने शहरों में विकास और नगर प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर किस तरह काम करती हैं।