एम्स जोधपुर में डॉक्टरों का बड़ा विरोध, OPD ठप; 8 हजार मरीज प्रभावित, 80 ऑपरेशन टले, ड्यूटी व्यवस्था पर उठे सवाल

AIIMS जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की मौत के बाद करीब 450 डॉक्टरों का विरोध जारी है। OPD प्रभावित हुई और 80 ऑपरेशन टाले गए।

एम्स जोधपुर में डॉक्टरों का बड़ा विरोध, OPD ठप; 8 हजार मरीज प्रभावित, 80 ऑपरेशन टले, ड्यूटी व्यवस्था पर उठे सवाल
Jodhpur aiims

एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों का विरोध अब बड़े आंदोलन में बदल गया है। प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव की मौत के बाद शुरू हुआ आक्रोश गुरुवार को काम के बहिष्कार और धरने में तब्दील हो गया। करीब 450 रेजिडेंट डॉक्टर ओपीडी ब्लॉक में धरने पर बैठे और प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगें रखीं। आंदोलन के कारण ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुईं, करीब 8 हजार मरीजों को इलाज नहीं मिल सका और पहले से तय लगभग 80 ऑपरेशन टालने पड़े।

हालांकि अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था को पूरी तरह बंद नहीं किया गया। ट्रॉमा, इमरजेंसी, आईसीयू और गंभीर मरीजों से जुड़ी जरूरी सेवाएं सीनियर डॉक्टरों की निगरानी में जारी रहीं। आपातकालीन सर्जरी, प्रसव, ब्लड बैंक और आवश्यक जांच जैसी सेवाओं को भी चालू रखा गया है।

राजनरेश यादव की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध

रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव मंगलवार को एम्स के रेस्ट रूम के बाथरूम में अचेत अवस्था में मिले थे। बाद में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद से ही रेजिडेंट डॉक्टरों में नाराजगी है। मौत की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम स्थिति पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि घटना की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने आनी चाहिए। उनका आरोप है कि संस्थान में लंबे समय से स्टाफ की कमी और काम के दबाव की समस्या है। डॉक्टरों के मुताबिक जूनियर रेजिडेंट्स से कई बार 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जाती है।

450 रेजिडेंट डॉक्टर धरने पर बैठे

गुरुवार को करीब 450 रेजिडेंट डॉक्टर ओपीडी ब्लॉक में एकत्र हुए और काम का बहिष्कार किया। उन्होंने एम्स प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग उठाई।

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी शिकायत केवल हालिया घटना तक सीमित नहीं है। वे लंबे समय से ड्यूटी के घंटों, स्टाफ की कमी, आराम के पर्याप्त समय और काम करने की परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे प्रशासन के सामने रखते रहे हैं।

दिनभर धरने के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने कैंडल मार्च भी निकाला। इसके बाद वे एम्स डायरेक्टर के आवास तक पहुंचे और फिर वापस ओपीडी परिसर लौट आए।

 डायरेक्टर ने की बातचीत, लेकिन नहीं बनी सहमति

एम्स डायरेक्टर डॉ. जीडी पूरी धरनास्थल पर पहुंचे और रेजिडेंट डॉक्टरों से बातचीत की। प्रशासन की ओर से डॉक्टरों को काम पर वापस लौटने की अपील की गई। शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित कमेटी, फैकल्टी और विभागाध्यक्षों ने भी डॉक्टरों से संवाद किया।

हालांकि रेजिडेंट डॉक्टर अपनी मांगों पर कायम रहे। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

डॉक्टरों ने रखीं कई मांगें

रेजिडेंट डॉक्टरों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें राजनरेश यादव की मौत की पारदर्शी जांच और मामले से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग प्रमुख है। डॉक्टरों ने मृतक के परिवार को 5 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, बीमा और अन्य संस्थागत लाभ देने की मांग भी रखी है।

इसके अलावा रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन को आधिकारिक मान्यता देने और ड्यूटी व्यवस्था में सुधार की मांग की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि पर्याप्त स्टाफ और बेहतर कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए।

मरीजों पर पड़ा सीधा असर

रेजिडेंट डॉक्टरों के काम से दूर रहने का सबसे बड़ा असर अस्पताल आने वाले मरीजों पर पड़ा। करीब 8 हजार मरीजों के प्रभावित होने और लगभग 80 निर्धारित ऑपरेशन टलने की जानकारी सामने आई है।

एम्स प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अगले आदेश तक ओपीडी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि गंभीर मरीजों और आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए ट्रॉमा, इमरजेंसी और आईसीयू को चालू रखा गया है।

 IMA ने भी जताई चिंता

मामले को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी चिंता जताई है। आईएमए की ओर से डॉक्टरों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण, पर्याप्त आराम और बेहतर संस्थागत सहायता की जरूरत पर जोर दिया गया है। एम्स भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से भी आंदोलन को समर्थन दिए जाने की बात सामने आई है।

फिलहाल एम्स प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच बातचीत का दौर जारी है। डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन सेवाओं को सामान्य करने की कोशिश में जुटा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बातचीत के जरिए गतिरोध कब खत्म होता है और एम्स जोधपुर में नियमित ओपीडी सेवाएं कब बहाल होती हैं।