कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे पर किसान क्यों नाराज? जमीन से कनेक्टिविटी तक उठे सवाल

कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में प्रभावित गांवों के किसान और ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। किसान कृषि भूमि, एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट, गांवों की कनेक्टिविटी और भूमि अधिग्रहण की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे पर किसान क्यों नाराज? जमीन से कनेक्टिविटी तक उठे सवाल

कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित गांवों के किसानों और ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। किसान महापंचायत के नेतृत्व में ग्रामीण कलेक्ट्रेट मार्च, महापंचायत और ट्रैक्टर रैलियों के जरिए अपनी मांगें उठा रहे हैं। आंदोलन के दौरान “जान देंगे, जमीन नहीं” जैसे नारे भी लगाए जा रहे हैं।

किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा उनकी कृषि भूमि से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के रूट में उनकी उपजाऊ और बहु-फसली जमीन आ रही है। उनका दावा है कि जमीन अधिग्रहित होने से कई किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

खेत और गांवों की कनेक्टिविटी पर चिंता

आंदोलनकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे जमीन से करीब 15 फीट ऊंचाई पर बनने की स्थिति में खेतों और गांवों के बीच आवाजाही प्रभावित हो सकती है। किसानों का कहना है कि इससे ट्रैक्टर, मवेशियों और ग्रामीणों को खेतों तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है और स्थानीय कनेक्टिविटी भी टूट सकती है।

एलाइनमेंट और पारदर्शिता पर सवाल

किसान प्रतिनिधि एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि परियोजना की लंबाई पहले प्रस्तावित 181 किलोमीटर से बढ़कर करीब 209.5 किलोमीटर हो गई है। साथ ही, उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी जानकारियां और अधिसूचनाएं पर्याप्त पारदर्शिता के साथ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

मौजूदा NH-48 को चौड़ा करने की मांग

किसान नेताओं का तर्क है कि क्षेत्र में पहले से NH-48 और रेलवे की कनेक्टिविटी मौजूद है। ऐसे में नई उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के बजाय मौजूदा हाईवे को चौड़ा करने के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए।

मामले को लेकर किसान प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बातचीत के दौर भी जारी हैं। किसानों की मांग है कि भूमि अधिग्रहण और एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट से जुड़े मुद्दों पर उनकी आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे विकास परियोजना के साथ प्रभावित परिवारों के हितों की भी रक्षा हो सके।