दाऊद इब्राहिम पर UN की रिपोर्ट से भड़का भारत, पाकिस्तान और ओसामा बिन लादेन का दिया उदाहरण
UN रिपोर्ट में डी-कंपनी को भारत-आधारित बताने पर भारत की कड़ी आपत्ति। रघु पुरी बोले, दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में रहता है, रिपोर्ट में तथ्यों की अनदेखी।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में डी-कंपनी को भारत आधारित आपराधिक संगठन बताने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय प्रतिनिधि ने रिपोर्ट में तथ्यों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि दाऊद इब्राहिम लंबे समय से भारत से बाहर है और पाकिस्तान में रह रहा है।
अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम को लेकर भारत और संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष प्रतिवेदक के बीच नया विवाद सामने आया है। आतंकवाद से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दाऊद के आपराधिक नेटवर्क डी-कंपनी को भारत से जुड़ा संगठन बताए जाने पर भारतीय प्रतिनिधि ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि दाऊद इब्राहिम भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित अपराधी है और वर्षों पहले देश छोड़ चुका है। भारतीय पक्ष के अनुसार, वह पाकिस्तान में रह रहा है। भारत ने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार की जाने वाली रिपोर्ट में इतने महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है।
आखिर UN की रिपोर्ट में ऐसा क्या था, जिस पर भारत ने जताई नाराजगी?
यह विवाद संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट से शुरू हुआ। बेन सॉल आतंकवाद से निपटने के दौरान मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर काम करते हैं।
उनकी रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी संबंधों वाले 'भारत-आधारित' आपराधिक नेटवर्क डी-कंपनी का प्रमुख बताया गया।
भारत को इस विवरण पर आपत्ति है। भारतीय प्रतिनिधि का कहना है कि इस तरह की शब्दावली दाऊद की वर्तमान स्थिति और उसके खिलाफ भारत में लंबित मामलों को लेकर भ्रामक तस्वीर पेश कर सकती है।
भारतीय राजनयिक ने UN के सामने उठाए गंभीर सवाल
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने विशेष प्रतिवेदकों की रिपोर्ट में तथ्यात्मक सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। पुरी के अनुसार, गलत जानकारी वाली रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि सदस्य देशों से संबंधित संवेदनशील विषयों पर रिपोर्ट तैयार करते समय सभी प्रासंगिक तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए। खासकर आतंकवाद जैसे मामलों में अधूरी जानकारी से गलत निष्कर्ष निकलने का खतरा रहता है।
पाकिस्तान का नाम लेकर भारत ने किया ओसामा बिन लादेन का जिक्र
दाऊद इब्राहिम की मौजूदगी के सवाल पर भारत ने पाकिस्तान का नाम लेते हुए अल-कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन का उदाहरण दिया।
भारतीय राजनयिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में दर्ज विवरण के अनुसार दाऊद उसी देश में रह रहा है, जहां ओसामा बिन लादेन पाया गया था और अमेरिकी सैन्य अभियान में मारा गया था।
गौरतलब है कि मई 2011 में अमेरिकी विशेष बलों ने पाकिस्तान के एबटाबाद में अभियान चलाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।
इस संदर्भ के जरिए भारत ने एक बार फिर दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में होने के अपने लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराया।
1993 से भारत को है दाऊद इब्राहिम की तलाश
दाऊद इब्राहिम का नाम 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़ा है। इन हमलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था और सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां दाऊद को लंबे समय से तलाश रही हैं। भारत के अनुसार, वह 2003 में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले देश छोड़ चुका था।
भारतीय प्रतिनिधि ने इस बात पर जोर दिया कि दाऊद और उसके नेटवर्क से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करते समय 1993 से भारत में उसकी वांछित स्थिति का उल्लेख आवश्यक था।
2003 में क्यों आया था दाऊद का नाम UN की प्रतिबंध सूची में?
दाऊद इब्राहिम को वर्ष 2003 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अल-कायदा से संबंधित प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध किया गया था।
भारतीय पक्ष ने कहा कि उस समय दाऊद पहले से ही भारत के बाहर था। उसके अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की गई थी।
भारत का तर्क है कि रिपोर्ट में केवल डी-कंपनी को भारत आधारित बताना, जबकि दाऊद के देश छोड़ने और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संबंधों का पूरा संदर्भ न देना, तथ्यों की अधूरी प्रस्तुति है।
आतंकवाद पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं: भारत
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने यह भी कहा कि मानवाधिकारों की व्यवस्था का इस्तेमाल आतंकवाद या कट्टरपंथ को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने आतंकवाद के मामलों में निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की जवाबदेही मजबूत करने पर जोर दिया।
भारत का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में गलत या अधूरी जानकारी केवल संबंधित देशों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है।
अब क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
दाऊद इब्राहिम की मौजूदगी और उसके आपराधिक नेटवर्क को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।
ताजा विवाद में भारत ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टिंग के तरीके पर सवाल उठाया है। भारतीय पक्ष चाहता है कि ऐसे मामलों में किसी संगठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके प्रमुख की वांछित स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पूरा संदर्भ सामने रखा जाए।
फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय मंच पर तथ्यात्मक सटीकता और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग की अहमियत को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

