जयपुर चुनाव की इनसाइड रिपोर्ट: कहीं जाति तो कहीं समुदाय बनेगा गेमचेंजर, पढ़ें किस इलाके में कौन भारी
जयपुर नगर निगम चुनाव से पहले 150 वार्डों के सामाजिक और जातीय समीकरण चर्चा में हैं। भाजपा की रिपोर्ट में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में ब्राह्मण, राजपूत, जाट, माली, कुमावत, वैश्य, एससी, मीणा, गुर्जर और मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव का आकलन किया गया है।
जयपुर नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच वार्डों की लॉटरी के बाद अब राजनीतिक दलों का फोकस सामाजिक और जातीय समीकरणों पर टिक गया है। 150 वार्डों में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा जयपुर शहर की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट ने शहर की सियासत की तस्वीर को और स्पष्ट किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर की 10 विधानसभा सीटों में सामाजिक समीकरण एक जैसे नहीं हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों का प्रभाव दिखाई देता है।
नगर निगम चुनाव में आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद अब पार्टियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही सामाजिक समीकरण वाले उम्मीदवारों का चयन करना होगी। ऐसे में टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तक में स्थानीय सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
-10 विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग सियासी गणित
जयपुर शहर के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं का सामाजिक आधार अलग है। कहीं ब्राह्मण, राजपूत और जाट मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका में हैं तो कहीं माली, कुमावत और वैश्य समाज का प्रभाव दिखाई देता है।
सांगानेर और बगरू जैसे क्षेत्रों में एससी, मीणा और गुर्जर सहित कई सामाजिक समूहों का मिश्रित प्रभाव है। दूसरी तरफ आदर्श नगर और हवामहल के कुछ वार्ड मुस्लिम बहुल हैं, जिससे इन क्षेत्रों की चुनावी रणनीति बाकी विधानसभा क्षेत्रों से अलग दिखाई देती है।
यही वजह है कि राजनीतिक दलों के लिए नगर निगम चुनाव सिर्फ वार्ड स्तर का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक समीकरणों को साधने की बड़ी चुनौती भी बन गया है।
-विद्याधर नगर से झोटवाड़ा तक ब्राह्मण-राजपूत-जाट समीकरण
जयपुर के कई वार्डों में ब्राह्मण समाज प्रमुख सामाजिक समूहों में शामिल है। विद्याधर नगर से लेकर झोटवाड़ा, सांगानेर, मालवीय नगर, सिविल लाइंस, किशनपोल और हवामहल तक अलग-अलग वार्डों में ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव सामने आता है।
विद्याधर नगर और झोटवाड़ा के कई वार्डों में ब्राह्मण के साथ राजपूत और जाट समाज का समीकरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे वार्डों में उम्मीदवार का चयन करते समय राजनीतिक दलों को स्थानीय सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।
-सांगानेर में माली और ओबीसी समीकरण भी अहम
सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक समीकरण और ज्यादा विविध नजर आता है। यहां ब्राह्मण, राजपूत और जाट के साथ माली तथा अन्य ओबीसी समूह भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।
यानी सांगानेर के कई वार्डों में किसी एक सामाजिक समूह के बजाय कई समुदायों के बीच संतुलन बनाना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती हो सकता है। आरक्षण के बाद उम्मीदवार चयन में यह समीकरण और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
-माली-कुमावत-वैश्य समूह भी कई वार्डों में प्रभावी
रिपोर्ट में जयपुर के कुछ हिस्सों में माली, कुमावत और वैश्य समाज के मजबूत सामाजिक आधार का भी उल्लेख किया गया है। विद्याधर नगर, सांगानेर, मालवीय नगर और बगरू के कई वार्डों में इन समूहों की मौजूदगी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।
इन इलाकों में राजनीतिक दलों की रणनीति केवल जातीय समीकरण तक सीमित नहीं रहेगी। स्थानीय लोकप्रियता, संगठन में सक्रियता और वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की पकड़ भी टिकट वितरण में अहम भूमिका निभा सकती है।
-बगरू और सांगानेर में एससी-मीणा-गुर्जर का मिश्रण
बगरू और सांगानेर में सामाजिक समीकरण काफी बहुकोणीय दिखाई देता है। इन क्षेत्रों के अलग-अलग वार्डों में एससी, मीणा और गुर्जर समाज के साथ बैरवा, रैगर और खटीक जैसे समूहों की भी महत्वपूर्ण मौजूदगी बताई गई है।
ऐसे वार्डों में किसी एक समुदाय के आधार पर चुनावी रणनीति बनाना आसान नहीं होगा। राजनीतिक दलों को अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधते हुए उम्मीदवार तय करने होंगे।
-आदर्श नगर और हवामहल में मुस्लिम बहुल वार्ड
जयपुर के आदर्श नगर और हवामहल विधानसभा क्षेत्रों में कई वार्ड मुस्लिम बहुल बताए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आदर्श नगर के वार्ड 116, 117, 119, 125 और 126 में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 100 प्रतिशत बताया गया है।
वहीं हवामहल क्षेत्र के वार्ड 143 से 146 में मुस्लिम आबादी का हिस्सा करीब 70 प्रतिशत और वार्ड 147 में 100 प्रतिशत बताया गया है।
इन वार्डों की सामाजिक संरचना के कारण यहां चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन का तरीका शहर के अन्य हिस्सों से अलग हो सकता है।
-टिकट बंटवारे पर पड़ेगा सामाजिक समीकरण का असर
नगर निगम चुनाव में आरक्षण की लॉटरी के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने अगला बड़ा सवाल टिकट वितरण का है। किस वार्ड से किस सामाजिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए, यह फैसला स्थानीय समीकरणों के साथ पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी निर्भर करेगा।
भाजपा की ओर से तैयार की गई सामाजिक समीकरण संबंधी रिपोर्ट को इसी लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों और वार्डों की सामाजिक संरचना को आधार बनाकर चुनावी तस्वीर का आकलन किया गया है।
-150 वार्डों में मुकाबला, हर इलाके की अलग रणनीति
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में चुनावी मुकाबला होने वाला है। ऐसे में पूरे शहर के लिए एक जैसी रणनीति काम नहीं करेगी। किसी क्षेत्र में ब्राह्मण-राजपूत-जाट समीकरण अहम हो सकता है तो किसी वार्ड में माली-कुमावत-वैश्य समूह निर्णायक भूमिका में हो सकते हैं।
इसी तरह बगरू और सांगानेर में एससी, मीणा और गुर्जर सहित कई समुदायों का मिश्रण चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकता है। आदर्श नगर और हवामहल के मुस्लिम बहुल वार्ड अलग तरह की राजनीतिक तस्वीर पेश करते हैं।
अब देखना होगा कि आरक्षण की अंतिम तस्वीर और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा, कांग्रेस और अन्य दल किन चेहरों पर भरोसा जताते हैं। टिकट वितरण के बाद ही साफ होगा कि सामाजिक समीकरण किस पार्टी के पक्ष में कितना असर डालते हैं।

