611 स्कूल बिना भवन, 2 हजार में टॉयलेट नहीं! राजस्थान सरकार के आंकड़ों ने खोली सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। 611 स्कूल भवन विहीन, 2,047 में शौचालय और 1,049 में पेयजल सुविधा नहीं।

611 स्कूल बिना भवन, 2 हजार में टॉयलेट नहीं! राजस्थान सरकार के आंकड़ों ने खोली सरकारी शिक्षा व्यवस्था की पोल

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि प्रदेश के सैकड़ों सरकारी स्कूल आज भी अपने भवन के बिना संचालित हो रहे हैं। वहीं हजारों स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों के लिए शौचालय और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने दी। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 64,484 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 611 विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है। इसके अलावा 2,047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है।

611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं

सरकार के जवाब में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि राजस्थान में 611 सरकारी विद्यालय भवन विहीन हैं। यानी इन स्कूलों के पास खुद का स्थायी भवन नहीं है। ऐसे में इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को शैक्षणिक माहौल और आवश्यक सुविधाओं को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद अब सरकार की ओर से इन स्कूलों के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। सरकार ने भवन विहीन और जर्जर स्कूलों के लिए नए निर्माण कार्य का प्रावधान किए जाने की जानकारी दी है।

 2,047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं

सरकारी आंकड़ों का दूसरा बड़ा हिस्सा स्कूलों में शौचालय की उपलब्धता से जुड़ा है। प्रदेश के 2,047 राजकीय विद्यालयों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं होने की जानकारी सरकार ने दी है।

स्कूलों में शौचालय की सुविधा खास तौर पर बच्चों की दैनिक जरूरत और स्वच्छता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में इतने बड़े स्तर पर इसकी कमी सामने आना सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 1,049 स्कूलों में पेयजल की भी कमी

सिर्फ भवन और शौचालय ही नहीं, बल्कि कई सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। सरकार के अनुसार प्रदेश के 1,049 सरकारी विद्यालयों में पेयजल सुविधा नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल एक जरूरी सुविधा है। ऐसे में इन विद्यालयों में पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

स्कूलों की मरम्मत के लिए 550 करोड़ रुपए

सरकार ने विधानसभा में यह भी बताया कि स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए बजट में राशि का प्रावधान किया गया है। माध्यमिक शिक्षा के तहत विद्यालयों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए 550 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा गया है।

इस राशि का उद्देश्य स्कूलों की मौजूदा इमारतों और आवश्यक ढांचागत सुविधाओं को बेहतर करना है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

भवन विहीन और जर्जर स्कूलों के लिए 450 करोड़

इसके अलावा भवन विहीन और जर्जर विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपए की लागत से काम करवाने का प्रावधान किया गया है। यानी सरकार ने एक तरफ मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए बजट रखा है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे स्कूलों के लिए नए भवन बनाने की योजना भी बताई है, जिनके पास अपना भवन नहीं है या जो जर्जर स्थिति में हैं।

विधानसभा में सवाल, अब जमीन पर काम का इंतजार

सरकार के जवाब से यह साफ हुआ है कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी पूरी तरह दूर नहीं हुई है। 611 स्कूलों का भवन विहीन होना, 2,047 स्कूलों में शौचालय और 1,049 विद्यालयों में पेयजल सुविधा का अभाव इस चुनौती की तस्वीर सामने रखता है।

सरकार ने इन कमियों को दूर करने के लिए कुल 1,000 करोड़ रुपए के प्रावधान की जानकारी दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बजट में किए गए इन प्रावधानों का असर स्कूलों की जमीन पर कब दिखाई देगा।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भवन विहीन स्कूलों को स्थायी भवन कब मिलते हैं, शौचालय और पेयजल से वंचित विद्यालयों में सुविधाएं कब तक पहुंचती हैं और सरकार की ओर से घोषित बजट वास्तव में बच्चों के लिए बेहतर स्कूल व्यवस्था में कितना बदलाव ला पाता है।