छात्रसंघ चुनाव के लिए कांवड़ लेकर निकले छात्र, पुलिस से धक्का-मुक्की, सड़क पर गिरा जल, 5 छात्रों ने मंदिर पहुंचकर किया जलाभिषेक
राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को जयपुर की सड़कों पर एक अलग रूप में दिखाई दिया। छात्र इस बार हाथों में पोस्टर या ज्ञापन लेकर नहीं, बल्कि कांवड़ लेकर विधानसभा की ओर निकले।
राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जयपुर में छात्रों ने अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया। RLP नेता कमल चौधरी के नेतृत्व में छात्र गलता जी से कांवड़ में जल लेकर विधानसभा के पास स्थित विद्युतेश्वर महादेव मंदिर के लिए निकले। पुलिस ने छात्रों को आगे बढ़ने से रोका तो धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई और कुछ कांवड़ों का जल सड़क पर गिर गया। विरोध के बाद पांच छात्रों को मंदिर जाकर जल चढ़ाने की अनुमति दी गई। राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शुक्रवार को जयपुर की सड़कों पर एक अलग रूप में दिखाई दिया।
छात्र इस बार हाथों में पोस्टर या ज्ञापन लेकर नहीं, बल्कि कांवड़ लेकर विधानसभा की ओर निकले। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) से जुड़े नेता कमल चौधरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्रों ने गलता जी से जल भरा और विधानसभा के पास स्थित विद्युतेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए रवाना हुए। छात्रों का कहना था कि वे भगवान शिव से राजस्थान सरकार को 'सद्बुद्धि' देने और प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू होने की प्रार्थना करने जा रहे हैं। हालांकि विधानसभा की तरफ बढ़ते छात्रों को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
विधानसभा के पास था जलाभिषेक का प्लान
कमल चौधरी के मुताबिक छात्र लंबे समय से राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इस बार सावन के दौरान आंदोलन को कांवड़ यात्रा का रूप दिया गया। छात्र गलता जी पहुंचे, वहां से कांवड़ में जल लिया और विद्युतेश्वर महादेव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए पैदल रवाना हुए। यात्रा के दौरान छात्र छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर नारेबाजी भी करते रहे। छात्रों का तर्क है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व देने का माध्यम भी हैं।
स्टैच्यू सर्किल पर रोका पुलिस ने
कमल चौधरी का आरोप है कि यात्रा स्टैच्यू सर्किल पहुंची तो पुलिस ने छात्रों को आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच बहस हुई। छात्र आगे बढ़कर मंदिर तक जाने की मांग करते रहे, जबकि पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती रही। इसके बाद प्रदर्शनकारी अंबेडकर सर्किल की तरफ बढ़े, जहां एक बार फिर पुलिस और छात्रों का आमना-सामना हुआ।
धक्का-मुक्की में सड़क पर गिरा कांवड़ का जल
अंबेडकर सर्किल के पास स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई। कमल चौधरी के मुताबिक छात्रों को रोकने के दौरान हुई धक्का-मुक्की में कुछ कांवड़ों में रखा जल सड़क पर गिर गया। इसे लेकर छात्रों ने कड़ी नाराजगी जताई और वहीं पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक यात्रा निकालते हुए मंदिर में जल चढ़ाना चाहते थे और पुलिस को उनकी यात्रा में बाधा नहीं डालनी चाहिए थी। हालांकि पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने तक बदसलूकी या बल प्रयोग के आरोपों को छात्रों का आरोप ही माना जाना चाहिए।
पुलिस पर हल्का बल प्रयोग करने का आरोप
कमल चौधरी ने पुलिस पर छात्रों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि छात्र किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते थे और उनकी मांग केवल इतनी थी कि उन्हें कांवड़ में लाया गया जल विद्युतेश्वर महादेव मंदिर में चढ़ाने दिया जाए। काफी देर तक विरोध और बातचीत के बाद पुलिस तथा छात्रों के बीच सहमति बनी।
आखिरकार 5 छात्रों को मिली मंदिर जाने की अनुमति
हंगामे और समझाइश के बाद पांच छात्रों को विद्युतेश्वर महादेव मंदिर जाने दिया गया। छात्र मंदिर पहुंचे और कांवड़ में लाया गया जल भगवान शिव को अर्पित किया। छात्रों ने इस दौरान राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बहाल होने की प्रार्थना की। इस तरह जिस कांवड़ यात्रा को बड़ी संख्या में छात्रों के साथ मंदिर पहुंचना था, उसका समापन पांच छात्रों के जलाभिषेक के साथ हुआ।
कांग्रेस-BJP दोनों पर छात्रों का निशाना
इस आंदोलन की एक खास बात यह भी रही कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने केवल मौजूदा भाजपा सरकार को निशाने पर नहीं लिया। कमल चौधरी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राजस्थान के विद्यार्थी लंबे समय से चुनाव बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांग का समाधान नहीं हुआ। छात्र नेताओं का तर्क है कि चुनाव नहीं होने से कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की समस्याओं को उठाने वाला निर्वाचित प्रतिनिधित्व कमजोर हुआ है।
कांवड़ यात्रा से आंदोलन को नया रूप
छात्रसंघ चुनाव को लेकर राजस्थान में पहले भी प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन इस बार आंदोलन को धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक के साथ जोड़ने की कोशिश ने इसे अलग राजनीतिक रंग दिया है। गलता जी से जल भरना, कांवड़ लेकर विधानसभा क्षेत्र की तरफ जाना और महादेव से सरकार को 'सद्बुद्धि' देने की प्रार्थना करना—इस पूरी रणनीति के जरिए छात्र नेताओं ने अपने आंदोलन को सामान्य धरना-प्रदर्शन से अलग दिखाने की कोशिश की। अब सवाल यह है कि सरकार छात्रसंघ चुनाव की मांग पर क्या रुख अपनाती है। क्योंकि छात्रों ने संकेत दिया है कि चुनाव बहाली की मांग को लेकर उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में विरोध के दूसरे तरीके भी अपनाए जा सकते हैं। फिलहाल जयपुर में निकली कांवड़ यात्रा ने छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा एक बार फिर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचा दिया है।

