राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को आशुतोष रांका की खुली चुनौती, '10 शानदार सरकारी स्कूल बताइए, हम खुद जाकर देखेंगे'
CJP नेता आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को चुनौती दी है। बोले- 10 शानदार सरकारी स्कूल बताइए, टीम खुद जाकर स्कूलों की व्यवस्थाएं देखेगी।
राजस्थान में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को सीधे चुनौती देते हुए सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत देखने का ऐलान किया है। रांका ने कहा है कि वह बंगाल में तीन दिन बिताने के बाद जयपुर लौट रहे हैं और अब राजस्थान के सरकारी स्कूलों का दौरा करेंगे।
रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को निशाने पर लेते हुए कहा कि अगर सरकार को अपने कार्यकाल में किए गए कामों पर इतना भरोसा है, तो वह प्रदेश के 10 सबसे शानदार सरकारी स्कूलों की जानकारी दे। इसके बाद वह अपनी टीम के साथ इन स्कूलों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।
'10 शानदार स्कूल बताइए, हम खुद जाकर देखेंगे'
आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को संबोधित करते हुए लिखा कि उनके लिए एक ऑफर है। उन्होंने चुनौती के अंदाज में कहा कि मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान तैयार या बेहतर किए गए 10 सबसे शानदार सरकारी स्कूलों के नाम बताएं, ताकि वह अपनी टीम के साथ वहां पहुंचकर वास्तविक स्थिति देख सकें।
रांका का यह बयान महज स्कूल निरीक्षण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उन्होंने शिक्षा विभाग के उन दावों पर भी सवाल खड़ा किया है, जिनमें सरकारी स्कूलों में सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही जाती रही है।
सीधी भाषा में कहें तो रांका का सवाल है—अगर सरकारी स्कूलों में वाकई इतना सुधार हुआ है, तो फिर ऐसे 10 स्कूल दिखाने में परेशानी क्या है?
CJP के स्कूल दौरों के बाद पहले ही बढ़ा था विवाद
दरअसल, सरकारी स्कूलों को लेकर यह विवाद अचानक सामने नहीं आया है। इससे पहले भी CJP नेताओं की ओर से सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों, मीडिया और अन्य गतिविधियों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
विभाग की ओर से स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होने देने का तर्क दिया गया था। हालांकि, इस कदम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।
आलोचकों ने सवाल उठाया कि अगर सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं बेहतर हैं तो फिर उनकी जमीनी स्थिति देखने वालों को लेकर इतनी सख्ती क्यों? वहीं शिक्षा विभाग का पक्ष रहा है कि स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश और ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अब आमने-सामने 'दावे' और 'जमीनी हकीकत'
आशुतोष रांका के ताजा बयान ने बहस को एक नए मोड़ पर ला दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर ऐसे स्कूलों की सूची मांग ली है, जिन्हें सरकार अपने कार्यकाल की उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकती है।
रांका की चुनौती में शिक्षा मंत्री पर हल्का लेकिन सियासी तंज भी साफ नजर आता है। संदेश यही है कि भाषणों और सरकारी दावों से आगे बढ़कर स्कूलों को जमीन पर देखकर भी परखा जाए।
अगर शिक्षा विभाग 10 बेहतरीन सरकारी स्कूलों के नाम सामने रखता है, तो रांका और उनकी टीम के संभावित दौरे पर सबकी नजर रहेगी। वहीं यदि स्कूलों के निरीक्षण को लेकर फिर से रोक-टोक होती है, तो रांका इसे सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
सरकारी स्कूलों की तस्वीर पर लगातार उठते रहे हैं सवाल
राजस्थान में सरकारी स्कूल लंबे समय से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। सरकार की ओर से स्कूलों में नए भवन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल सुविधाएं, आधारभूत ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में किए गए कामों को उपलब्धि के तौर पर गिनाया जाता है।
दूसरी तरफ विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से कई स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, भवनों की स्थिति, पेयजल, शौचालय, तकनीकी संसाधनों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में रांका की चुनौती ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों की असली तस्वीर आखिर सरकारी रिपोर्ट में दिखती है या स्कूल की जमीन पर?
अब देखना होगा शिक्षा मंत्री क्या जवाब देते हैं
आशुतोष रांका के ऐलान के बाद राजनीतिक गेंद अब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के पाले में है। रांका ने 10 स्कूल दिखाने की चुनौती देकर सरकार को एक तरह से अपनी उपलब्धियां सार्वजनिक रूप से साबित करने का मौका भी दिया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा मंत्री इस चुनौती को स्वीकार करते हैं या सरकारी स्कूलों के निरीक्षण को लेकर विभाग के नियमों का हवाला देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि सरकारी स्कूलों का मुद्दा राजस्थान की सियासत में एक बार फिर गर्म होने वाला है और आने वाले दिनों में '10 स्कूलों' की यह चुनौती सरकार बनाम CJP के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर सकती है।

